जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर कार्रवाई का विरोध, राजेंद्र पाल गौतम ने छात्रों से की मुलाकात
रामपुर। मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त किए जाने के प्रस्तावित फैसले के विरोध में कांग्रेस ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी एवं पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने रामपुर पहुंचकर विश्वविद्यालय के मुख्य गेट पर धरना दे रहे छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं।
कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के भवनों को गिराने की कार्रवाई का फैसला शिक्षा व्यवस्था और उच्च शिक्षण संस्थानों के हित में नहीं है। उन्होंने प्रदेश की योगी सरकार की कार्रवाई को असंवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताया।
हालांकि, इस बीच मुरादाबाद मंडल के कमिश्नर ने जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने की कार्रवाई पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों को कुछ राहत मिली है।
विश्वविद्यालय में छात्रों और शिक्षकों से मुलाकात के बाद राजेंद्र पाल गौतम ने रामपुर के वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं, जिला एवं शहर कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारियों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ पूर्व सांसद तंजीम फातिमा से भी मुलाकात की। इस दौरान जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े मौजूदा विवाद और आगे की रणनीति पर चर्चा की गई।
राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि कांग्रेस पार्टी विश्वविद्यालय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का राजनीतिक और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी। उन्होंने कहा कि जौहर विश्वविद्यालय को बचाने के लिए पार्टी हर संभव कदम उठाने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद् और राष्ट्रवादी नेता मौलाना मोहम्मद अली जौहर के नाम पर स्थापित है। कांग्रेस का कहना है कि ऐसे संस्थान का संरक्षण केवल एक विश्वविद्यालय को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के स्वतंत्रता आंदोलन और शिक्षा के माध्यम से सामाजिक जागरण की विरासत को सम्मान देने से भी जुड़ा हुआ है।
कांग्रेस नेता ने प्रदेश सरकार से अपील की कि विश्वविद्यालय से जुड़े विवाद का समाधान कानूनी और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि केवल राजनीतिक मतभेदों के कारण किसी शिक्षण संस्थान को निशाना बनाना उचित नहीं है।
फिलहाल 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर रोक के बाद अब इस मामले में आगे की प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।

